| DARBHANGA STORY POEM COMMENT ARTICLE WRITER |
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KAMLAKANT JHA
(MAITHILI POET)
ADD-SARSWATI VIHAR
LAXMISAGAR COLONY,DARBHANGA
06272-224173 |
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जल्द ही हम आप तक अच्छे लेखक की रचनाएँ पहुंचाएंगे ।
दरभंगा और आस-पास के सभी लेखकों से आग्रह है की वे अपनी रचनाएँ हमें भेजें ,
हमें उन्हें प्रकाशित करने में खुशी होगी ।
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Books are the carriers of civilization. Without books, history is silent, literature dumb, science crippled, thought and speculation at a standstill.
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| MUST READ |
खाउ मैथिली,पियू मैथिली,
हम त' कहै छी -
सरिखन जियू मैथिली;
किछु कहबैक हुवै,
जे किछु लिखबैक हुवै,
धरि म'न के सुनू-
मैथिली के चुनू।
अपन मैथिली,ई सरस मैथिली,
एकरा अपन अंतःकरण में राखू।
पढू मैथिली,लिखू मैथिली,
जे नइ आबैत हुवै
त' सिखू मैथिली,,,
सरिखन जियू मैथिली।
मिथिला के नौनिहाल छी हम
काइल के लेल तैयार छी हम!
जे आइब रहल अछि
प्रखर-पुँज
ओइ नव युग के
आधार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!
हम छी भविष्य अइ मिथिला के,
छी नौनिहाल अइ धरती के;
जे ताइक रहल अछि
घुइर-घुइर,
ओइ स्वर्णयुग के
आसार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!
विपदा अनेक अइ धरती पर
अछि आइ मचेने त्राहि-त्राहि;
फइला जे रहल अछि
अनहार सघन,
ओइ दानव के
संहार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!
अपावन भेल इ जानकी-ग्राम,
घट-घट पर रावण बइसल अछि;
जे नइ हुअक चाही
अइ धरती पर
ओइ अनीति के
प्रतिकार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!
ध्वस्त करु अइ जर्जर के,
किछु नूतन आऊ स्रिजन करी;
जे अछि वरेण्य
अइ मिथिला लै,
ओइ क्रान्ति के
विस्तार छी हम।
काइल के लेल तैयार छी हम!)
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